Tuesday, April 7, 2015

आज का पैगाम

जवाब मिल गए होंगे सवालों के आपको, 
जानिए आप भी खयाल हमारे   ,
लिख दिए हमने इन पन्नो पे श्याही से,
वों जज़्बात नहीं सिर्फ ,परछाई है अरमानो की 
कुछ आप और हम जब मिलेंगे ,
लगता हे तब सैलाब आएगा ,
तब तक इनेही  संवार के रखना
अरमान हमारे ईन लफ्जों  में पिरोये .


Monday, April 6, 2015

सूफ़ी

अमिरी नहीं ,ग़रीबी नहीं ,बस फ़कीरी से वास्ता है हमारा ,
मिल जाए ज़मी का आसरा ,ये आसमा है हमारा ,
खता न ख़स्ता हो किसी से ,इतनी ही चाह है ,
जिंदगी को जीने और जानने कि प्यास है ,
न कोई अरमा न कोई इबादत-ए-ख़ास है ,
काम आए ये वजूद किसी वजूद को ,
वंही जन्नत है वंही परवर दीगार है .  

शर्म

खाली लगती थी हमें राहें जंहा ,वंही कांरवा मिल गया ,
उन भूखे नंगे बदनो में हमें तू राज़दा मिल गया ,
सर उठाने की ना हममें शर्म है ,
कब्रस्तान तो है यहाँ ,
पर हर घर में एक कब्र है 
 
जंहा क्या हम एसा बनाना चाहते है,
कब्रों पे किसी और की हम क्यों नाचते है
बस सोच कर देखो ए दोस्त ,
क्या एसा जंहा हम जीना चाहते है 

हरकदम

खवाइशे कितनी इन आँखों में समाए,
निकले है आज कुछ नया कर दिखाने,
अरमान अब कुछ और जग रहें है ,
सपने भी आज कल नए बन रहें है ,
लग रही है प्यास कुछ और पाने की ,
रास्ते भी अब हमसफ़र बन रहे है ,
बदलेंगे आज ज़माने  को हम ,
बस रहिएगा आप हमारे हरकदम. 

Khudai

तू न हो यूँ खफ़ा ए मुसाफ़िर ,कारवां-ए-ज़मीर तेरे साथ है ,
तेरे उसूल तेरे रहनुमा ,तेरे साथ है ,
सच्चाई है तेरे दिल में ,फिर ख़ुदा भी तेरे साथ है,
लगे जो कभी अकेलापन ,तेरे यार की खुदाई याद कर ,
उस हसीन ने भी ख्वाब देंखे होंगे ,
उसी ख्वाब में अपना दीदार कर ,
उसके ख्वाबों को अपना-कर,
तू बस तू आगे बढ़ ....बस आगे बढ़  

Khvab

सपने संवार के संजोके रख दिए,
धागों में हमने उन्हें पिरोके रख दिए ,
ख्वाबों में आप के, हमने जो लम्हे जिए ,
बस उसीके सहारे हम तो चल दिए . 

Yaar

आरज़ू ए जल्वे हुश्न की ,फ़िर बातो में क्या रखा है
जब नाम ही काफ़ी है मेरे यार का ,तब दिदार में क्या रखा है .

जंग

लड़ना तुझे सिर्फ तुझसे ही है 
आसरा तेरा बस तुही है 
कतरा वों क्या कम आएगा 
जो खुद ही डूब जाएगा
ख़ूदा  से वास्ता बस एक ही है
हिम्मत-ए-मर्दा  तो मदद-ए -ख़ुदा  

आस

ज़िंदगी कोई अपसाना लग रहा था 
खली खली कोई फ़साना लग रहा था 
बस ईसी बात की आस लगाए बैठे थे 
याद आएँगे हम भी किसीको 
बातो में वों बात आ गयी
अनसुनी फरियाद हो गयी
सुना किसने हमारी बात को क्या पता
शुक्र है की आप हमारे साथ आ गए