तू न हो यूँ खफ़ा ए मुसाफ़िर ,कारवां-ए-ज़मीर तेरे साथ है ,
तेरे उसूल तेरे रहनुमा ,तेरे साथ है ,
सच्चाई है तेरे दिल में ,फिर ख़ुदा भी तेरे साथ है,
लगे जो कभी अकेलापन ,तेरे यार की खुदाई याद कर ,
उस हसीन ने भी ख्वाब देंखे होंगे ,
उसी ख्वाब में अपना दीदार कर ,
उसके ख्वाबों को अपना-कर,
तू बस तू आगे बढ़ ....बस आगे बढ़
Nice one Khushvant. Keep it up👍
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