Wednesday, September 10, 2014

आरज़ू

वख्त नहीं कटता ईन लम्हों को गिनके ,
      लग रही है आग इन दीवारो मे दिलके
खली है कमरे ईस खली दिल के ,
       नहीं मिट रही है प्यास सिर्फ आरज़ू को लिख के।
ख्वाईश हमारी है की कोई अज़ीज़ हो ,
       कोई  हमें मिले ,हम उतने भी खुशनसीब हों.
लम्हे बीत जा रहे है ज़िन्दगी के ,
        प्यार आपका भी हमें नसीब हो। 

Sunday, September 7, 2014

शख्शियत

समजौता करना वख्त से , फितरत नहीं  हमारी ,
                   बदलना वख्त को ,ये है आदत हमारी।
लड़ना पड़ जाए ,ज़माने से अगर
                   लड़ लेंगे हम ,   हम ज़माने से कम नहीं ,
अकेले आज हम है ,कोई  गम नहीं ,
                   एक, अकेले  से  कांरवा  बना लेंगे।
करना है बुलंद ईस  खुदी को ,
                   चाहे शहादत भी क्यों नसीब न हो। 

इंतज़ार

ठहर न पाते ये लफ़्ज़  ईस श्याही पर ,
          अगर आप पर हमको भरोसा न होता ,
आएंगे  आप हमारी जिंदगी में 
           वो रूहानी दिलासा न होता ,
हँसेगी ज़रूर  पढ़के आप ,
            उस ख़ुशी का इंतज़ार न होता। 

AAJ

















आसमान है सामने गुनगुनाता हुआ
             सूरज भी उठा है कुछ कहता हुआ 
जिंदगी की ढलती शामो से पहले 
             आज कुछ ,कुछ  कर दिखाना है 
ये आज ही तो है हाथो मे ,
              कल ?! कल का पता नहीं।