वख्त नहीं कटता ईन लम्हों को गिनके ,
लग रही है आग इन दीवारो मे दिलके
खली है कमरे ईस खली दिल के ,
नहीं मिट रही है प्यास सिर्फ आरज़ू को लिख के।
ख्वाईश हमारी है की कोई अज़ीज़ हो ,
कोई हमें मिले ,हम उतने भी खुशनसीब हों.
लम्हे बीत जा रहे है ज़िन्दगी के ,
प्यार आपका भी हमें नसीब हो।
