Aashiq
Sunday, September 7, 2014
AAJ
आसमान है सामने गुनगुनाता हुआ
सूरज भी उठा है कुछ कहता हुआ
जिंदगी की ढलती शामो से पहले
आज कुछ ,कुछ कर दिखाना है
ये आज ही तो है हाथो मे ,
कल ?! कल का पता नहीं।
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