समजौता करना वख्त से , फितरत नहीं हमारी ,
बदलना वख्त को ,ये है आदत हमारी।
लड़ना पड़ जाए ,ज़माने से अगर
लड़ लेंगे हम , हम ज़माने से कम नहीं ,
अकेले आज हम है ,कोई गम नहीं ,
एक, अकेले से कांरवा बना लेंगे।
करना है बुलंद ईस खुदी को ,
चाहे शहादत भी क्यों नसीब न हो।
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