Aashiq
Monday, April 6, 2015
आस
ज़िंदगी कोई अपसाना लग रहा था
खली खली कोई फ़साना लग रहा था
बस ईसी बात की आस लगाए बैठे थे
याद आएँगे हम भी किसीको
बातो में वों बात आ गयी
अनसुनी फरियाद हो गयी
सुना किसने हमारी बात को क्या पता
शुक्र है की आप हमारे साथ आ गए
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