Monday, April 6, 2015

हरकदम

खवाइशे कितनी इन आँखों में समाए,
निकले है आज कुछ नया कर दिखाने,
अरमान अब कुछ और जग रहें है ,
सपने भी आज कल नए बन रहें है ,
लग रही है प्यास कुछ और पाने की ,
रास्ते भी अब हमसफ़र बन रहे है ,
बदलेंगे आज ज़माने  को हम ,
बस रहिएगा आप हमारे हरकदम. 

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