खवाइशे कितनी इन आँखों में समाए,
निकले है आज कुछ नया कर दिखाने,
अरमान अब कुछ और जग रहें है ,
सपने भी आज कल नए बन रहें है ,
लग रही है प्यास कुछ और पाने की ,
रास्ते भी अब हमसफ़र बन रहे है ,
बदलेंगे आज ज़माने को हम ,
बस रहिएगा आप हमारे हरकदम.
निकले है आज कुछ नया कर दिखाने,
अरमान अब कुछ और जग रहें है ,
सपने भी आज कल नए बन रहें है ,
लग रही है प्यास कुछ और पाने की ,
रास्ते भी अब हमसफ़र बन रहे है ,
बदलेंगे आज ज़माने को हम ,
बस रहिएगा आप हमारे हरकदम.
Very nice. Keep it up buddy :)
ReplyDeleteThank you shyam bahi.
DeleteThank you shyam bahi.
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